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चुनार क्यों प्रसिद्ध है

Chunar


मिरजापुर से 36 किलोमीटर  गंगानदी के दक्षिण चोर पर स्थित है 
वहीं वाराणसी से 30किलोमीटर के दूरी पर स्थिति h 

Chunar  Mirzapur se lagbhag 36 aur Varanasi se 30 kilometer dur   hai

https://www.uptourism.gov.in/en


चुनार किला chunar Ford 

https://mirzapur.nic.in/tourism/



 किला गंगा नदी के दक्षिण तट पार स्थिति हैं एक प्राचीन किला हैं
उज्जैन के  सम्राट  विक्रमादित्य 56 AD
चुनार किले पर 1441 से लेकर 1191 तक पृथ्वीराज चौहान का सासन रहा 
1532 में शेर खान   ( शेर शाह सूरी ) का सासन रहा 
1553 से शेर शाह  के बाद  उसके पुत्र इस्लाम शाह का सासन रहा 
आदिल शाह अंतिम सूरी वंश के शासन किया उसके बाद हिंदू सेना पति हेमू को  सासन दे दिया 
 1557 में किला मुग़ल नियंत्रण में आया फिर ईस्ट इंडिया कम्पनी के हाथों में 

चुनार किले का  सटीक विश्लेषण  संजीव सल्यान ने अपनी पुस्तक  लैंड ऑफ सेवेन रिवर हिस्ट्री इंडिया जियोग्राफी में किए है 

मीरजापुर के चुनार में मूर्ति कला 
मूर्तिकला शिल्प कला का रूप है जो त्रिवियम होता है यह एक कठोर पदार्थ मीनू पदार्थ एवं प्रकाश आदि से बनाए जाते हैं मूर्तिकला एक प्राचीन कला है
की बेलन घाटी में पुरापाषाण युग से लेकर नव युग तक के उपकरणों का एक अनुक्रम प्राप्त हुआ है बेलन नदी घाटी में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर G.Rशर्मा के निर्देशन में अनुसंधान किया गया था बेलन टोंस की सहायक नदी है मिर्जापुर के मध्य पटरी क्षेत्र में नदी बहती है पूर्व पाषाण काल से संबंधित यहां 44 पूरा स्थल प्राप्त हुए हैं जहां हैंड क्लीबर स्केपर चापर 
पिपिंग आदि सभी प्रकार के उपकरण प्राप्त हुए हैं उपकरणों के अतिरिक्त बेलन के लोहदा नाला क्षेत्र से इस काल की अस्थि निर्मित मातृ देवी की एक  प्रतिमा मिली है जो कौशांबी संग्रहालय में सुरक्षित है 
चुनार  मूर्ति बाजार 
मूर्ति कला में चुनार एशिया में सबसे अग्रणी है  हस्त मूर्ति बनाने और बेचने में  यह सबसे बड़ा बाजार है हस्त मूर्ति का 
जरगो नदी 
अहरौरा से करीब दस किमी पश्चिम स्थित सोनबरसा पुल से तीन किमी दक्षिण जरगो जलाशय है। पहाड़ों के बीच स्थित जरगो जलाशय के मध्य स्थित टापू पर सैलानियों की निगाहें ठहर जाती हैं। पर्यटन की दृष्टि से यह इलाका आकर्षण का केंद्र है। टापू को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन का मुख्य केंद्र बन सकता है।
 साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। 
1958 में जरगो नदी पर बांध का निर्माण हुआ। जलाशय में पानी
 की क्षमता तीन हजार क्यूसेक की है। जलाशय से नौ हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है। सात नदियों और 70 नाले के पानी को समाहित करने वाले इस जलाशय का दृश्य अत्यंत मनोरम है। जलाशय के मध्य स्थित टापू से जलाशय का दृश्य अत्यंत विहंगम नजर आता है। जंगली जानवर व पशु भी जलाशय के टापू पर विचरण करते रहते हैं।
Chunar murti kala 



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