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उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती नाम के आगे टाइटल लगाने से भर्ती अधेड़ में!

 उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार असिस्टेंट टीचर्स की भर्ती में नये-नये विवाद लगातार सामने आते जा रहे हैं. विवादों की वजह से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भर्ती पर रोक लगा रखी है. इस भर्ती में कभी गलत सवाल पूछने के आरोप लगते हैं तो कभी शिक्षा मित्रों का विवाद सामने आता है. कभी फॉर्म भरने में गलतियों का मुकदमा कोर्ट पहुंचता है तो कभी गरीबों को दस फीसदी आरक्षण नहीं मिलने का मामला तूल पकड़ने लगता है.

ये विवाद अभी ठंडे भी नहीं हुए कि अब अपने नाम के साथ जनरल कैटेगरी के ब्राह्मण वर्ग की टाइटल लगाने वाली अभ्यर्थी को उसकी मार्कशीट में ओबीसी दिखाए जाने का नया विवाद सामने आया है. आजमगढ़ की अभ्यर्थी अर्चना तिवारी की मार्कशीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. वायरल मार्कशीट के साथ यह दावा किया जा रहा है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और लापरवाही की यह एक बानगी प्रyagrajज  में जब यह साफ हो गया कि गलती परीक्षा नियामक प्राधिकारी की नहीं है, बल्कि अभ्यर्थी अर्चना तिवारी ने खुद ही अपने फॉर्म में ओबीसी कैटेगरी का विकल्प चुना है तो मामला और उलझ गया. हमारे दूसरे संवाददाता खुर्रम नोमानी आगे की पड़ताल के लिए आजमगढ़ में अर्चना तिवारी के घर पहुंचे.


अर्चना  के परिवार वालों ने बताया कि वह लोग वास्तव में अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं और गुसाईं जाति से ताल्लुक रखते हैं. मंदिरों में चढ़ावे की रकम को खर्च करने वाले गुसाईं जाति के लोग #ओबीसी कैटेगरी में ही आते हैं. अर्चना के परिवार वालों ने यह भी बताया कि वह लोग सिर्फ दिखावे के लिए ही तिवारी टाइटल का इस्तेमाल करते हैं. पूरा विवाद सिर्फ इसलिए पैदा हुआ क्योंकि ओबीसी कैटेगरी की अर्चना ने अपने नाम के साथ तिवारी टाइटल का इस्तेमाल किया था.








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